Understanding Meditation and Focus
ध्यान कैसे करें?
ध्यान। पहले तो समझें ध्यान क्या
है। ध्यान जब मुझे कुछ चाहिए तो
ध्यान घटित हो जाता है तो ध्यान तो स्वतः अपने आप घटित होता है।
ध्यान करना नहीं है। ध्यान
स्वाभाविक घटित हो रहा है। ध्यान को समझना है। घटित कहां हो रहा है। जो
मुझे चाहिए उस पर ध्यान घटित हो जाता है। जैसे मुझे भोजन चाहिए। ध्यान
कहां चला जाता है, भोजन में। भोजन को मिल गया तो ध्यान कहीं और
चला
जाता है। हमारी जरूरतों में ध्यान घूम रहा है। आप समझ रहे हैं। ध्यान तो
हर वक्त घटित हो रहा है। हर समय घटित हो रहा है। कहां हो रहा है इच्छाओं
में, इच्छाओं में। ठीक है तो अब आप चाहते हैं कि
परम ध्यान जो है आपको घटित हो, जो आपको प्रसन्नता
दे तो निर्विकार होने के लिए आप धारणा बनाइए। पहले आपको धारणा
करनी पड़ेगी। चाहिए में ध्यान घटित होता है। तो आप देखिए जो
आपको चाहिए धारणा बनती है, ध्यान घटित हो जाता है। धारणा,
ध्यान, समाधि, तुम ब्रह्म। समझ रहे हैं
तो आप जो है निर्विकार होने के लिए धारणा बनाइए कि मैं छल, कपट, चोरी,
बेईमानी, चापलूसी, मकारी, धूर्तता, पाखंड से वैसे मुक्त हो जाऊं। जब
इसके लिए आप पक्की धारणा बनाएंगे तो ध्यान उस पर घटित होगा और
अपने आप धारणा, ध्यान, समाधि, तुम ब्रह्म अपने मैं तक पहुंच जाओगे।
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