Understanding Love and Attachment
तू पूछता है केशव, अगर मोह नहीं होगा तो क्या प्रेम बचेगा?
तुझे लगता है कि किसी को कसकर पकड़ना ही प्रेम है?
तुझे लगता है कि खोने का डर ही प्रेम का सबूत है?
पर सत्य यह है मित्र, जहां मोह होता है वहां प्रेम घुटकर मर जाता है।
और जहां सच्चा प्रेम होता है, वहां मोह का अंधेरा टिक ही नहीं सकता।
आज मैं तुझे प्रेम और मोह के बीच की वह बारीक रेखा दिखाऊंगा,
जिसे समझने के बाद तेरे रिश्ते कभी तुझे दर्द नहीं देंगे।
सबसे पहले समझ कि मोह आखिर है क्या? मोह का अर्थ है 'मेरा'।
जब तू किसी इंसान से प्रेम नहीं करता, बल्कि उससे मिलने वाले सुख से प्रेम करता है, वह मोह है।
मोह कहता है, 'तू मेरे हिसाब से चल ताकि मुझे खुशी मिले।
तू बदल मत, तू दूर मत जा, तू सिर्फ मेरा है।'
मोह एक जंजीर है मित्र।
और याद रख, जंजीर चाहे लोहे की हो या सोने की, वह कैद ही करती है।
तो फिर प्रेम क्या है? मोह मांगता है, 'तुझसे मुझे खुशी चाहिए।'
प्रेम देता है, 'मैं तेरी खुशी में खुश हूं।'
मोह एक भिखारी है, जो हमेशा डरता है कि मेरा क्या होगा।
प्रेम एक राजा है, जो कहता है, 'तू जहां भी रहे, बस खिलता रहे।'
जब तू फूल को पसंद करता है, तो तू उसे तोड़कर जेब में रख लेता है और वह मर जाता है।
पर जब तू फूल से प्रेम करता है, तो तू उसे पानी देता है और उसे पेड़ पर ही रहने देता है।
पूछ अपने आप से, तू तोड़ना चाहता है या खिलाना चाहता है?
अब तेरे मन में वही सवाल है, 'केशव, यह सुनने में अच्छा है, पर क्या यह संभव है?'
अगर मेरा बेटा, मेरी पत्नी या मेरा प्रिय मुझसे दूर जाए, तो क्या मुझे दुख नहीं होगा?
दुख होगा मित्र, शरीर के स्तर पर पीड़ा होगी। पर मोह मुक्त होने का मतलब पत्थर दिल होना नहीं है।
मोह मुक्त होने का मतलब है सच्चाई को स्वीकार करना।
यह स्वीकार करना कि यह व्यक्ति मेरे जीवन में एक उपहार है, मेरी संपत्ति नहीं।
यह यात्री है और मैं सराय हूं।
हम मिले हैं, पर हम एक दूसरे के मालिक नहीं हैं।
इसे एक उदाहरण से समझ। रिश्ते रेत की तरह होते हैं।
अगर तू अपनी मुट्ठी कसकर बंद करेगा, तो रेत उंगलियों से फिसल जाएगी और तू खाली हाथ रह जाएगा।
लेकिन अगर तू अपनी हथेली खुली रखेगा, तो रेत वहीं टिकी रहेगी। सच्चा प्रेम खुली हथेली है।
तू दूसरे को उड़ने की आजादी देता है।
और आश्चर्य देख, उस आजादी के कारण ही वह बार-बार तेरे पास लौट आता है।
तू पूछेगा, 'मैं यह कैसे करूं? मैं मोह कैसे छोड़ूं?'
भूमिका निभा, पर चिपक मत।
नर्स अस्पताल में मरीज की सेवा करती है, पूरी ममता से, पूरे प्रेम से।
पर जब मरीज ठीक होकर जाता है, तो नर्स रोती नहीं है।
क्यों? क्योंकि वह जानती है कि उसकी भूमिका पूरी हुई।
तुझे भी अपने परिवार के साथ यही सेवा भाव रखना है, स्वामित्व भाव नहीं।
दो, केंद्र मुझे बना। जब तू इंसान में सुख ढूंढेगा, तो वह तुझे दुख देगा, क्योंकि इंसान बदलता है।
जब तू इंसान में मुझे देखेगा, तो तेरा प्रेम अमर हो जाएगा।
तुझे सबसे बड़ा डर खोने का है ना? अगर वह चला गया तो?
मित्र, जो तेरा है, वह कभी जा नहीं सकता। और जो जा रहा है, वह कभी तेरा था ही नहीं।
मोह तुझे भूतकाल या भविष्य में उलझाता है। प्रेम तुझे वर्तमान में जीना सिखाता है।
मोह के बिना प्रेम संभव ही नहीं, बल्कि मोह के बिना ही शुद्ध प्रेम संभव है।
जैसे कमल का पत्ता पानी में रहता है, पर पानी उसे गीला नहीं कर पाता,
वैसे ही तू संसार में रह, रिश्तों में रह, गहरा प्रेम कर।
पर अपनी खुशी की चाबी किसी की जेब में मत डाल।
जब तू यह समझ लेगा कि हम सब एक ही यात्रा पर हैं,
तो तू दूसरे को जकड़ेगा नहीं, बल्कि उसका हाथ थामकर साथ चलेगा।
यही राधा का प्रेम था, जिसमें कोई मांग नहीं थी, कोई बंधन नहीं था। इसलिए वह प्रेम आज भी जीवित है।
मित्र, अपने प्रेम को इतना हल्का बना दे कि दूसरे को तेरे साथ उड़ने में आसानी हो, बोझ न लगे।
मोह तुझे कमजोर बनाता है, प्रेम तुझे निडर बनाता है।
आज से मालिक बनकर नहीं, माली बनकर...
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