Reflection on Indian Independence and Revolutionaries
आज की अपनी स्वतंत्रता जो मिली है वो मिली है।
उस साल तक जितने क्रांतिकारी दिवंगत हो
गए,
अंग्रेजों के साथ सशस्त्र लड़ाई देके, चाहे वह
फांसी में चले गए,
चाहे वनवास में जाकर बर्बाद हुए,
चाहे अंडमान में उनकी जहती जैसी की जैसी रही। चाहे वो
सुभाष बाबू के
समान
सेना समर में आकर हजारों सशस्त्र आग्नि
चैनिकों ने
अंग्रेजों के साथ लड़ाई लेते-देते, चाहे वह रण में रहे।
ऐसे जितने क्रांतिकारी 1857 से
1947 तक दिवंगत हो गए जो आज
हमारे।
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