Philosophical Insights on Creation
हम सब बचपन से सुनते आए हैं कि यह ब्रह्मांड किसी बड़े धमाके से बना था।
लेकिन अगर आप भारत के सबसे पुराने दर्शन में उतरें, तो सच इससे कहीं ज़्यादा गहरा है।
सृष्टि की शुरुआत किसी धमाके से नहीं, एक बहुत गहरे सन्नाटे की जागृति से हुई थी।
एक ऐसा समय था जब समय जैसा कुछ था ही नहीं। ना अंधेरा, ना उजाला, ना कोई रूप।
बस एक अचल और शांत उपस्थिति थी, जिसे हमारे शास्त्रों ने शिव कहा।
शिव का मतलब कोई इंसान नहीं, बल्कि वो असीम चेतना जो बिल्कुल शांत पड़ी थी।
फिर उस अचल सन्नाटे में एक पहली लहर उठी, एक चाहत खुद को महसूस करने की,
और उसी पल शक्ति जागृत हुई।
शिव वो सच हैं जो कभी बदलता नहीं, और शक्ति वो ऊर्जा है जो आकार लेती है।
उस पहली चाहत से अस्तित्व में एक गूंज उठी, पहला कंपन हुआ,
और धीरे-धीरे यह पूरी भौतिक दुनिया बनने लगी।
आज आप जिस ज़मीन पर खड़े हैं, जो हवा अपनी सांसों में खींच रहे हैं,
यह सब कुछ उसी पहली गूंज का ही फैला हुआ रूप है।
आप इस ब्रह्मांड से अलग नहीं हैं, आप उसी पहले स्पंदन का हिस्सा हैं।
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