Political Commentary on Leadership and History
एक जाहिल इस मुलक की रहनमाई करे, तो उसका दिल यही चाहेगा
कि पूरा मुलक उसी की तरह जाहिल,
ना समझ, ना काबिल, और बेरहम बनें।
सब याद रखा जाएगा। वैसे भूले तो हम भी नहीं हैं,
तुम्हारे चाटुकार परदादा जन फिशन खान को,
तुम्हारा चाटुकार ब्रिटिशर्स के तलवे चाटने वाला परदादा,
जिसने 1857 में राणी लक्षमी भाई जैसे सेनानियों के पीठ में खंजर भोका था,
और ब्रिटिशर्स के
तलवे चाटकर पब्लिक के, बारत के लोगों के थोड़े आयें,
डेमोक्रेटिक प्रोसेस से चुन कर आयें,
ये साले दो कौड़ी के लिबरल, अपने को ये बताते हैं कि ये बहुत बड़े एक्वालिटी में बिलीव करने वाले,
डेमोक्रेटिक प्रोसेस से चुना हुआ जो प्रदान मंत्री है,
उसकी बार-बार बेज़की करने पे, उसको चाई वाला,
और इस तरह से क्लासिस रिमार करने पे ये बाज नहीं आते,
एक जाहिल इस देश की रहनुमाई करें,
वो अच्छा ही है इससे कि एक गद्दार,
तुमारे जसा गद्दार इस देश की रहनुमाई करें।
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