Debate on Islamic Practices and Toilets
साहिल से मैंने कई बार demand किया। सवाल जितने कहा है ना सब जवाब ready
है। हां सब जवाब ready with PowerPoint ready है। एक बार बोल दो ना। कुल्लू column
सदीदा सीधी-सीधी बात बोल दो। क्या है तुम्हारा objection?
मेरे अजीजो, मेरे जिगर के टुकड़ों और मेरे मोमिन भाइयों,
अब तक लोग जो
है वो slavery के ऊपर इस्लाम छोड़ते थे, pedophilia के ऊपर इस्लाम छोड़ते थे। अब आज
की
debate के बाद इंशाअल्लाह अल्लाह की चाहत से वमा तशाऊ ना इल्ला यशा अल्लाह हु रब्बुल
आलमीन। तुम हर कि चाह ही नहीं सकते जब तक अल्लाह रब्बुल आलमीन नहीं चाहेगा। अल्लाह
चाहेगा लोग toilet के ऊपर इस्लाम छोड़ेंगे। क्यों?
क्योंकि ज़ैद पटेल साहब के पास जवाब तो है लेकिन अब तक मेरे ख्याल से चार-पांच
turn चली गई है। ज़ैद पटेल साहब का जवाब नहीं आया। वो हदीस नहीं आई कि
रसूलल्लाह ने नौ बीवियों के लिए और खुद के लिए उन्होंने toilet का
बंदोबस्त किया।
घर में शौचालय नहीं बनने देंगे। ना खाएंगे, ना खाने देंगे तो शौचालय क्यों
बनवाएं?
मेरे रसूल की हालत आप देखिए कि जब उनकी मौत आई तब भी उनको पेशाब जाने की
जरूरत पड़ी लेकिन जा नहीं सकते थे। toilet नहीं था तो अम्मी आयशा से कहा कि भाई एक काम
करो प्याला लेकर आइए। लेकिन प्याला लेकर आई अम्मी आयशा यानी आखिरी जो
ख्वाहिश थी या आखरा जो आखिरी जो मरहला था कि बदन से जो है वो पेशाब मुबारक निकल जाए,
वो भी निकल नहीं पाया। प्याला आने तक रसूलल्लाह की, रसूलल्लाह का इंतजार हो गया।
क्या कहती हैं आयशा? They say that the messenger of Allah made a will
concerning
अली। May अल्लाह be pleased with him but he called for a vessel in
which to urinate.
Then he went limp without me realizing it.
So to whom did he leave a will? अम्मी आयशा कहती है कि मैं प्याला लाने तक
रसूलल्लाह
ठंडे पड़ गए। रसूलल्लाह ठंडे पड़ गए थे। उनका इंतजार हो गया था। वो अल्लाह की जानिब
चले गए थे। मुझे बताइए कि अगर चांद के दो टुकड़े करने के बजाय ज़ैद पटेल
साहब, अगर अल्लाह ने रसूलल्लाह को technology दी
होती toilet की, बंद
कमरे में toilet की, पाखाना तो आज रसूलल्लाह का इस तरीके का हाल
नहीं
होता। मैं कल क़यामत के दिन अल्लाह से जो है वो ज़रूर इस बात का सवाल करूंगा।
End of transcript · 392 words