Nationalistic Speech on Divine Heritage
पर मैं अपने राष्ट्र की परवाह करता हूँ इसलिए आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप आतताई
व
विध्वंसकारी लक्ष्येंद्र का साथ न दें।
पाश्चात्य जगत ने तो धरती को सिर्फ एक ही देवपुत्र दिया है। पर यह
वह भूमि है जिसने करोड़ देवपुत्रों को जन्म दिया है। यह वह धारा है जहाँ
मानव को भी ईश्वर बनने का अवसर दिया जाता है। हम देवों के ही तो वंशज
हैं अतः
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