Understanding Desire and Contentment
हम लोग क्या है जब अपने से
आगे वाले को देखते हैं कार में,
विशेष सुविधाओं में,
विशेष धनी तो ऐसा लगता है कि यह सुखी
है। हमें एक भ्रम बना रहता है।
अपनी पत्नी, अपने धन, अपने मकान,
अपने पुत्र, अपना ज्ञान
इससे हम संतुष्ट नहीं रहते। हम दूसरों
की पत्नी, दूसरों के धन, दूसरों का मकान, दूसरों की सुविधा, दूसरों का
बुद्धिमानी
भले वो बेईमानी से कमा रहा है हमारे अंदर ही रहता है। हमारे बगल वाला
हमसे ज्यादा सुखी है। अमुक सुखी है। अगर मेरे पास इतना धन
हो तो मैं सुखी हो जाऊं।
सौ की सोचता है, फिर हजार में पहुंचता है, फिर लाख में पहुंचता है, फिर
करोड़ों में पहुंचता है, फिर अरबों में पहुंचता है। वो बढ़ता चला
जाता है।
माया का कार्य है मांग को बढ़ाना।
भक्ति का कार्य है मांग को मिटा देना।
जब माया में आप रहेंगे तो आपकी कामनाएं बढ़ती रहेंगी। यह हो जाए, यह हो जाए, यह हो
जाए। और जब भक्ति होगी तभी होगा जोई जोई प्यारो करे सोई
मोही भावे। प्यारे जो करेंगे
वह बहुत अच्छा करेंगे, बहुत अच्छा करेंगे। विश्वास करो तुम्हारी
जीभ से स्पर्श होना चाहिए। राधा राधा राधा राधा
राम राम राम राम कृष्ण कृष्ण कृष्ण श्याम सदाशिव श्याम
परम मंगल हो जाएगा। इसलिए सबसे प्रार्थना है
चलते फिरते, उठते बैठते नाम जप कीजिए और कुछ समय एकांत
में बैठकर नाम जप
कीजिए।
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