Sikh Soldiers' Rebellion After Operation Blue Star
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद सिख सैनिकों का सबसे बड़ा विद्रोह
बिहार में रामगढ़ में सिख रेजिमेंटल सेंटर में हुआ।
इस विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे एक सिख सैनिक गुरनाम सिंह।
जब अमृतसर की घटनाओं की खबर उन तक पहुंची तो उनमें बहुत बेचैनी थी।
उनकी इस बेचैनी को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया
और ना ही उनका कॉन्फिडेंस डेवलप करने की कोशिश की गई।
सुबह 10:00 बजे बहुत सारे सिख सैनिक जमा हुए और उन्होंने आर्मरी पर हमला बोल दिया।
वहां पर तैनात सैनिकों ने उनका किसी तरह का कोई विरोध नहीं किया।
जब यह खबर वहां के कमांडेंट ब्रिगेडियर एस. सी. पुरी के पास पहुंची
तो वो अपने दो अफसरों के साथ एक कार में सवार होकर आर्मरी की तरफ बढ़े।
जैसे ही वो आर्मरी के पास पहुंचे, उन पर गोली चलाई गई।
उनके दो मातहत अफसर कार से उतरकर नीचे उतरे, लेकिन वो कार में नहीं उतर पाए।
थोड़ी देर बाद जब हालात पर उनका नियंत्रण नहीं हुआ, तो वो अफसर दोबारा कार में चढ़ गए
और वो उनको लेकर सीधे आर्मी मेडिकल हॉस्पिटल में पहुंचे।
जहां 11:25 पर ब्रिगेडियर पुरी की मृत्यु हो गई।
उनका सिख ड्राइवर भी इस firing में मारा गया।
रिबेल सैनिक गाड़ियों में बैठकर अमृतसर की तरफ बढ़ने लगे।
वहां से अमृतसर की दूरी 840 मील थी।
190 किलोमीटर के बाद सक्तेशगढ़ रेलवे स्टेशन आता है, वहां पर उनको रोका गया।
आखिरकार 21वीं मैकेनाइज्ड डिवीज़न ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
इसी तरह नॉर्थ ईस्ट में थ्री सिख के जवानों ने, पुणे में, अलवर में
और कश्मीर में भी सिख सैनिकों ने अपनी यूनिट्स छोड़ीं और वो अमृतसर की तरफ बढ़ने लगे।
सेना के अधिकारियों से हालात...
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