चना, दाल और बादाम भिगोने का समय और वजह
चने कम से कम आठ घंटे भिगोने हैं।
काले चने भी, सफेद चने भी।
सारी दालें साबुत खानी हैं आज के बाद।
धुली हुई दालें नहीं खानी। अच्छा।
और दालों को पहले ऐसे भिगोना है कम से कम चार घंटे।
आज आपको एक भिगोने की साइंस बता देता हूँ, आप सबके दर्शकों के काम आ जाएगी।
हम बादाम भिगो के क्यों खाते हैं?
कहते हैं उसके अंदर कोई इस तरह के कंपाउंड्स होते हैं जो न्यूट्रिएंट की अब्सॉर्प्शन को रोकते हैं।
तो वो निकल जाते हैं।
कोई भी ड्राई फ्रूट बिना...
या उसका तासीर गर्म होती है तो वो ठंडक...
बिल्कुल सही बोला आपने, मैं अब इसको साइंस बता देता हूँ।
जब भी जो चीज़ धरती पर उगती है,
अगर उसको उस रूप... उस दिन नहीं खाया जाए, उस टाइम नहीं खाया जाए,
तो प्रकृति उसके अंदर के न्यूट्रिशन को कंप्रेस कर देती है।
और उसको बीज रूप में कन्वर्ट कर देती है।
कि भाई तेरे को खाया नहीं, अब तू अगली को पैदा कर।
बीज बन गया ना वो, बीज बन गया।
तो उसके जो एनर्जी थी, कॉम्प्लेक्स हो गई।
स्क्वीज़ फॉर्म हो गई।
अब उसको कोई कीड़ा-मकोड़ा ना खाए,
उसके ऊपर एक एंटी-न्यूट्रिएंट की लेयर चढ़ा देती है। प्रकृति। नेचर।
अब एंटी-न्यूट्रिएंट मतलब टॉक्सिन।
अब वो बादाम भी है, अखरोट भी है।
अच्छा आपके घर में दाल कितनी देर भिगोई जाती है?
आधा-पौना घंटा।
चार घंटे भिगोनी है आज के बाद कम से कम।
चार घंटे भीगती है, तब उसका टॉक्सिन पार्ट बाहर आता है।
और उसका जो कंप्रेस्ड फॉर्म है न्यूक्लियस, वो खुलता है, सॉल्युबल फॉर्म में आता है।
तो जैसे हमने बादाम भिगोया आठ घंटे, रात को भिगोया सुबह खाया।
हाँ जी।
तो बादाम में जो एंटी-न्यूट्रिएंट था वो पानी में आ गया।
और जो उसके अंदर कॉम्प्लेक्स न्यूट्रिशन था, कंसंट्रेटेड फॉर्म में, जो प्रकृति ने कर दिया था,
वो सॉल्युबल फॉर्म में आ गया, डाइजेस्टेबल फॉर्म में आ गया।
तो हर बीज रूपी वस्तु को भिगो के खाना है।
चने कम से कम आठ घंटे भिगोने हैं।
काले चने भी, सफेद चने भी।
सारी दालें साबुत खानी हैं आज के बाद।
धुली हुई दालें नहीं खानी। अच्छा।
और दालों को पहले ऐसे भिगोना है कम से कम चार घंटे।
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