बिजली से AI तक: विकास परियोजनाओं के विरोध पर सवाल
2 min About India Politics
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इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं?
और अगले ही दिन ये लोग डेम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए दफ्ली लेकर आ जाएंगे।
यानी पहले दिन बिजली क्यों नहीं? और दूसरे दिन, तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो?
यह जमात ऐसी है। ये वो लोग हैं जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे।
लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल बनर कहां है, supply chain कहां है?
और भारत में फलाने देश की तरह electric vehicle का ecosystem क्यों नहीं है?
ये वही लोग हैं जो कभी data या आटा इसकी debate चलाते थे।
पहले data कि आटा, data कि आटा। बड़ा मजा आता था।
आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी AI में क्या काम हुआ?
हद देखिए। एक एक ही सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में ये होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं?
लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे ये data center क्यों बना रहे हो?
ये semiconductor plant क्यों लगा रहे हो?
और फिर ये लोग उसके hundred नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर social media के screen पर दिखेंगे, TV debate में दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।
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