Hindi transcript
बेटी ने MBBS कर ली, MD कर लिया, प्रैक्टिस कर रही है, अच्छे से बड़े से हॉस्पिटल में।
हमें लगता था कि इसके लिए तो फटाफट झट से रिश्ता मिल ही जाएगा,
इतनी अच्छी क्वालिफिकेशन है, इतनी सुंदर है, स्लिम-ट्रिम है, स्मार्ट है।
पहले तो बेटी कहती थी कि मम्मा मैं डॉक्टर हूँ तो मेरी डॉक्टर से ही विचार मैच हो पाएँगे। तो हम डॉक्टर ही देखने लग गए।
अब जब डॉक्टर देखने हैं तो कोई... कहीं कोई कमी मिलती है, कहीं कोई... 32-32, 33-33 साल के तो डॉक्टर्स हो ही जाते हैं,
प्रैक्टिस करते-करते, पढ़ते-पढ़ते। उसमें तो कोई आशंका ही नहीं है। तो हमें भी लगता था चलो इस...
इसी प्रोफेशन में देखेंगे तो हमें मुश्किल भी नहीं आएगी देखने में।
कि डॉक्टर्स तो मिल रहे हैं लेकिन 33... 32-33 साल के, 34 साल के बिल्कुल अंकल ही लगने लग गए हैं।
मतलब वो एक... अब आजकल तो दिक्कत ये है ना 25-26 साल में कर दो तो दिक्कत। तो बच्चों को इतनी सोच और समझ नहीं होती।
उसके बाद उनके 29-30 तक विचार थोड़े से और डेवलप हो जाते हैं, फिर उनकी प्रेफरेंसेस और चॉइसेज और डेव... और अलग हो जाती है।
अब जब ये 32-33 साल के हो जाते हैं, जब इनमें पूरी मैच्योरिटी आ जाती है,
दुनियादारी की समझ आ जाती है, तब तक ये अंकल-आंटी दिखने लगते हैं।
अब हमारी बेटी तो... बेटी ने तो साथ-साथ पढ़ाई के साथ-साथ फिटनेस पे भी ध्यान दिया और हमने भी... हमारा जेनेटिक भी होता है।
और हर किसी... 32-32, 33-33 साल के लड़के, 34 साल के लड़के हैं, कोई गंजा है, कोई किसी के बाल उड़ गए हैं,
कही कोई मोटा हो गया है, कोई... मतलब, अरे देखने में... अब बेटी को थोड़ा देखने में भी ठीक-ठाक चाहिए।
अब हमें डॉक्टर लड़के ठीक... ऐसे ही मिल रहे थे, तो फिर हमने कहा चलो दूसरी स्ट्रीम्स में देख लेते हैं।
कि भाई विचार तो तुम्हारे किसी के साथ भी मिल सकते हैं ना। तो हम... अब हमने अलग प्रोफेशन में भी देखने शुरू किए।
वही प्रॉब्लम आ रही है। एक लड़का ढंग का नहीं मिल रहा है।
एक थोड़ा सा स्मार्ट और गुड लुकिंग था, तो उसकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन नहीं थी, तो फिर वो लड़की को वैसे पसंद नहीं आया।
रिश्तेदारों को फोटो दिखाते हैं, तो वो पहले ही हमें ही ताने देने लगते हैं,
"अरे तुम्हारी इतनी सुंदर... सुंदर लड़की है, स्मार्ट लड़की है, इसके लिए क्या अंकल और बुड्ढे-बुड्ढे जैसे लड़के देख रहे हो?"
अब हम क्या करें? हमारे हाथ में थोड़ी है। हमारे हाथ में तो बस देखना और बात करना है।
अब मैंने तो यही समझाया है बेटा थोड़ा बहुत कॉम्प्रोमाइज कर लियो कहीं। थोड़ी बहुत लुक्स तो चल जाती है।
नेचर तो एवरलास्टिंग होता है। नेचर... लास्ट में तुम्हारे... किसी तुम्हारे...
जिसके साथ रहना है उसको तुम्हें नेचर ही काम आएगा।
अब थोड़ा बहुत जैसा... अब अपीयरेंस, हाइट-वेट, नाक-नक्श, ये तो हम... हमारे हाथ में है ही नहीं।
होते तो हम सब अपने आप को सुधार लेते, जिसको जैसे नाक-नक्श चाहिए होते सब अपने आप बदल लेते।
मतलब... बच्चों के चेहरे पे चमक ही नहीं रही है।
34-35, 35-35 साल के लड़कों का ये हाल है तो
55... 50-60 के होते-होते तो पता नहीं बिल्कुल ही पता नहीं बुड्ढे लगने लगेंगे।
ये तो खाने का क्या असर पड़ रहा है, हवा-पानी का असर पड़ रहा है, ये तो बहुत मुश्किल हो रही है।
मतलब बच्चों को लुक्स भी चाहिए, बच्चों को क्वालिफिकेशन भी चाहिए, सारी चीजें चाहिए।
अब देख रहे हैं, ढूंढ रहे हैं, ढूंढते ही रहना पड़ेगा, यही एक सॉल्यूशन है हमारे पास तो।
अभी तक तो कोई शॉर्टलिस्ट भी नहीं किया है।
और थोड़ा हमें पसंद आता है तो फिर रिश्तेदारों को बताते हैं तो फिर वो नाक-नुकुर कर देते हैं।
तो वही है, अब हम अपनी तरफ से तो ट्राई कर रहे हैं, देखते हैं कब तक मिलता है।
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