वाल्मीकि रामायण में राम-परशुराम संवाद और विष्णु धनुष
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परशुराम जी बहुत क्रोधित होकर आते हैं कि किसने शिव धनुष धनुष को तोड़ने का कार्य किया है।
तो हमने क्या देखा है कि लक्ष्मण जी उठते हैं।
लक्ष्मण जी क्रोध में और लक्ष्मण जी अनाप शनाप कहने लगते हैं परशुराम जी को कि आपने ऐसे कैसे कह दिया वगैरा और श्रीराम उनको शांत करें कि नहीं नहीं तुम ऐसे मत बात करो। है ना।
अब यह प्रसंग वाल्मीकि रामायण में ऐसा नहीं है क्योंकि वाल्मीकि रामायण में जो श्रीराम का ही जो पूरा व्यक्तित्व है वह तुलसीदास जी के राम से थोड़ा सा अलग है।
इसमें श्रीराम स्वयं परशुराम जी को उत्तर दे रहे हैं।
परशुराम जी मैं आपको जानता हूं। मैंने आपको पहचाना।
मैंने आपके सारे पराक्रम के बारे में भी सुना है।
परंतु आप भी मुझे कम ना किए। मेरा क्या पराक्रम है, वो मैं आपको दिखा सकता हूं।
बताओ मैं क्या करूं? और उस समय परशुराम जी कहते हैं कि अच्छा तुम ऐसे कह रहे हो उठाओ ये विष्णु धनुष पर विष्णु धनुष पर तुम प्रत्यंचा चढ़ाओ।
अच्छा ये प्रसंग भी जो है ये विवाह के स्वयंवर के दौरान नहीं हुआ है।
ये जब विवाह हो चुका है तब सारे लोग वापस जा रहे हैं।
जब अयोध्या की ओर जब वापस जा रहे थे तब रास्ते में ये हुआ है।
End of transcript · 214 words
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