तुलसी और मट्ठे से कैंसर में लाभ का दावा: बनाने की विधि
गुरुदेव जी ने बताया कि बच्चा, 35 तुलसी का पत्ता डंडी समेत।
हर पत्ते के पीछे डंडी होता है, जिससे पत्ता लगा रहता है ब्रांच के साथ, टहनी के साथ ले लीजिए।
शुद्ध देशी गाय का दूध एक पाव होना चाहिए।
उस दूध को शाम के समय जो चीनी मिट्टी के आते हैं बर्तन, इसमें गरम करें और उसी में दही जमा दें।
सुबह उसमें स्वच्छ जल एक पाव मिला दें।
पहले आधा पाव मिलावें और लकड़ी की मथानी से खूब मंथन करें उसको।
मंथन करने के बाद फिर थोड़ा जल और मिला दें, फिर और मिला दें।
इस प्रकार से आधा लीटर मट्ठा तैयार कर लें।
इस बनाये हुए मट्ठे में 35 तुलसी का पत्ता,
अगर आपके पास चीनी मिट्टी का खरल है तो उसको घोट लीजिए,
और मट्ठा डाल करके, मिला करके, सारा मट्ठे में डाल लीजिए।
कोई भी धातु नहीं लगना चाहिए, मेटल टच नहीं होना चाहिए उसको।
उस मट्ठे में मिला करके पहला आहार आप उसको लीजिए।
नियमित लेने से एक से डेढ़ से दो महीने तक के अंदर, कैंसर वाला बीमारी इसका गुण प्रभाव प्रत्यक्ष मिलेगा।
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