सूर्या की मौत और असद के एनकाउंटर पर लोगों की प्रतिक्रिया

- सूर्या की मौत की कुछ पता नहीं आपको? - हम गाँव से आए हैं।

सबको लकवा मार गया है यहाँ के तमाम लोगों को जो बोलना ही नहीं चाहते हैं।

खड़ा होकर तमाशा देखने के लिए हो आप लोग बस यहाँ पे? आपके घर में भी कुछ हो जाएगा तो नहीं बोलोगे?

अरे भैया, भाग कहाँ रहे हो? आपसे बात करने आए हैं।

- क्या कहोगे असद का एनकाउंटर हो गया? - हम तो अभी आ रहे हैं, बाहर से आ रहे हैं, दिल्ली से आ रहे हैं हम तो।

- यहीं सीधे लैंड कर गए? - हाँ, सीधे आ रहे हैं।

पूरे मुस्लिम समुदाय का मत लीजिएगा, प्लीज़।

देखिए, आप आप बिल्कुल मैं चाहती थी कोई हमको ये जवाब दे, हम उसको एकदम अच्छा जवाब सोच के...

सूर्या की मौत हो हो जाती है बकरीद पे, मतलब ऐसा होना चाहिए?

नहीं, ये गलत हुआ है बिल्कुल।

- गलत हुआ है? - बिल्कुल गलत हुआ है।

मतलब मानिए कि आपका ही कोई दोस्त होगा, बुला के कि आओ बकरीद पे कैसे बकरा हलाल होता है दिखाएँगे

और उस बच्चे को मार दिया जाए, आपका भाई हो वो, तब भी आप नहीं बोलेंगे?

- बोल तो रहा हूँ गलत हुआ है। - गलत हुआ है?

- और असद का एनकाउंटर हुआ है, वो भी गलत हुआ है? - नहीं, सही हुआ है वो।

- बाकी के जो आरोपी हैं, उनके साथ क्या कार्रवाई होनी चाहिए? - कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और सज़ा मिलनी चाहिए।

- तो आप मुस- मुस्लिम हैं? - जी, बिल्कुल।

किसी को असद के एनकाउंटर से परेशानी है?

- किसी को असद के एनकाउंटर से परेशानी है? - नहीं, नहीं, नहीं।

सूर्या की मौत हो हो जाती है बकरीद पे, मतलब ऐसा होना चाहिए?

नहीं, ये गलत हुआ है बिल्कुल।

- गलत हुआ है? - बिल्कुल गलत हुआ है।

मतलब मानिए कि आपका ही कोई दोस्त होगा, बुला के कि आओ बकरीद पे कैसे बकरा हलाल होता है दिखाएँगे

और उस बच्चे को मार दिया जाए, आपका भाई हो वो, तब भी आप नहीं बोलेंगे?

- बोल तो रहा हूँ गलत हुआ है। - गलत हुआ है?

- और असद का एनकाउंटर हुआ है, वो भी गलत हुआ है? - नहीं, सही हुआ है वो।

- बाकी के जो आरोपी हैं, उनके साथ क्या कार्रवाई होनी चाहिए? - कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और सज़ा मिलनी चाहिए।

- तो आप मुस- मुस्लिम हैं? - जी, बिल्कुल।

देखिए, जो मैं यही चाहती हूँ कि भैया, आप लोग भी बोलिए।

आप आप लोग के मुँह पता नहीं क्यों सिल जाते हैं, मतलब क्यों मतलब सबको लकवा मार गया है यहाँ के तमाम लोगों को जो बोलना ही नहीं चाहते हैं।

सही, गलत जो भी है, बोलिए ना। आपके बच्चे के, आपके घर-परिवार में होगा तब भी आप लोग आवाज़ नहीं उठाओगे? ये तो बात ही नहीं होती है।

- बोल तो रहा हूँ मैं। - हाँ। सर, आप कुछ...

मैं तो कह रहा हूँ हर अपराधी जो ऐसा मतलब जो ऐसी जघन्य अपराध करता है, उसका एनकाउंटर ही होना चाहिए।

और तस्वीर वगैरह की बात रही, ये तो प्रशासन के और लॉ एंड ऑर्डर उनके हाथ में है, तस्वीरें दिखाना ना दिखाना ये उनका काम है। लेकिन...

ये जो एनकाउंटर हुआ है, बहुत बढ़िया हुआ है। मैं तो कह रहा हूँ हर अपराधी का एनकाउंटर होना चाहिए।

और जो उसके साथ जितने भी जो बाद-बाकी अपराधी हैं, उनका भी एनकाउंटर करे पुलिस, जो भी इस पूरी वारदात में शामिल हैं, सबका एनकाउंटर हो।

- लोग कह रहे हैं आपसी रंजिश भी थी, ऐसा कुछ था क्या? कुछ पता है आपको असद... - आपसी रंजिश होगी तो इस तरह कोई किसी की जान ले लेगा क्या?

- ये आप बोल रहे हो? - जी, मैं बोल रहा हूँ। - नाम क्या है आपका? - मेरा नाम मोहम्मद सुज़ाम है।

ऐसे कोई किसी की जान ले लेगा? किसी माँ का लाल छीन लेगा? पेट में इतने चाकू मारेगा क्या?

लोग तो कह रहे हैं कि आपके समुदाय के लोग हाँ या ना, सही या गलत बोलने के मूड में नहीं हैं, नहीं बात कर रहे हैं। आप क्यों बोल रहे हैं? बाकी लोगों के तो मुँह सिल दिए गए, आपके क्यों खुल रहे हैं?

नहीं, नहीं, ऐसा कोई नहीं है, हमारे समुदाय के लोग बोल रहे हैं। ज़्यादातर यहाँ हमारे समुदाय के लोग हैं,

मैं पूछना चाहता हूँ सबसे। किसी को असद के एनकाउंटर से परेशानी है?

- नहीं जी। किसी को असद के एनकाउंटर से परेशानी है? - नहीं, नहीं, नहीं।

लो, देखो, ये भी तो मेरे समुदाय के लोग हैं।

- अच्छा हुआ असद का एनकाउंटर हुआ है, बहुत अच्छा हुआ है। - मिठाइयाँ बाँटी हैं असद का एनकाउंटर...

- क्या, क्या कह रहे हो? - मिठाइयाँ बाँटी हैं।

- क्यों मिठाई बाँटी है? - असद का एनकाउंटर हुआ, पुलिस ने अच्छा काम करा, एक माँ को तसल्ली दी है।

एक माँ को अपना बेटा 20 साल का करने में कितना वक्त लगता है?

और फिर एकदम से उसकी आँखों के सामने से ओझल हो जाना, उस माँ पे पूछो क्या गुज़र रही होगी। और मैं तो कह रहा हूँ...

ये जघन्य अपराध, ये एक नया अपराध नहीं, इन तीन-चार दिनों में कितने अपराध हुए हैं, आपको पता है? आप तो पत्रकार हो।

एक चिराग त्यागी गाज़ियाबाद में, उसकी माँ भी एनकाउंटर का इंतज़ार कर रही है।

जहाँगीरपुरी में श्वेब, उसकी माँ का भी, उसकी माँ भी इंतज़ार कर रही है कि एनकाउंटर हो अपराधी का।

जेवर में गोपाल शर्मा, एक 15 साल का बच्चा, वो बेचारा बताओ उसके गुप्तांग तक काट दिया जाता है,

उसकी आँखें तक नोच ली जाती हैं, उसकी पूरी बॉडी डैमेज।

तो ऐसे अपराधियों को तो एनकाउंटर ही करे सरकार

और हम भी समर्थन करते हैं एनकाउंटर का।

- आपके ही समुदाय के कुछ लोग कहते हैं कि सिर्फ... - अभी मैंने आपको सुनवाया ना, ये सब मेरे समुदाय के लोग हैं।

End of transcript · 928 words

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