यूपी में प्रदर्शन पर नौकरी का डर और जामिया छात्र आंदोलन
2 min About India Politics
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डर क्या होता है? आइए आपको हालिया कुछ example से समझाती हूँ।
उत्तर प्रदेश सरकार कहती है कि अगर आपने किसी भी प्रदर्शन में participate किया तो आपको सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी और अगर आपके पास नौकरी होगी तो वो नौकरी चली जाएगी। ये डर उस व्यक्ति का आपसे है कि कहीं आप सड़कों पर उतरे तो उनका सिंहासन न हिल जाए। इसी उत्तर प्रदेश में छात्र हर महीने 3 से 4 बोतल खून बेचते हैं। तब अपना किराया देते हैं,
खाना खाते हैं। इन छात्रों को सरकारी नौकरी का डर दिखाया जा रहा है कि आप सड़कों का रुख मत करना। आपको नौकरी नहीं मिलेगी। जो छात्र अपना खून बेचकर अपनी पढ़ाई कर सकता है, वो आपके इन फैसलों से डरेगा। दरअसल, डर आपके अंदर है कि कहीं ये छात्र सड़कों पर उतरे, अपने हक और अधिकार की मांग करने लगे। ये विद्रोही हो गए तो
आपका सिंहासन हिल जाएगा। डर आपको है जनता से। तब आप ऐसे फैसले ले रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ सरकार social media accounts लगातार remove कर रही है, post को हटा रही है। यहां तक कि पूरे के पूरे accounts को delete कर दे रही है। सरकार को डर है कि कहीं सच जनता के सामने आ गया और जनता सवाल करने लगी और सच पूछने लगी तो कहीं हिसाब न देना पड़ जाए और अगर हिसाब दिया तो उस झूठ को face करना पड़ेगा जो इन्होंने अब तक जनता से बोला है,
जो हेराफेरी की है। यही डर इनको मजबूर कर रहा है सच को छुपाने से कि कहीं सच न दिख जाए। वहीं तीसरी खबर जामिया से है कि जामिया university को तब्दील कर दिया गया है छावनी में। छात्रों की घेराबंदी कर दी गई है। जो छात्र अनशन पर बैठे हुए हैं, भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। खाना,
पानी सब कुछ रोक दिया गया है। Basic hygiene की facilities तक को रोक दिया गया है और एक चक्रव्यूह बना दिया गया है छात्रों के लिए कि कहीं यह अनशन, कहीं यह protest बाहर न निकल जाए। दरअसल, यह घेराबंदी अपने लिए की जा रही है कि हम सुरक्षित रहे।
लेकिन एक चक्रव्यूह महाभारत में भी टूटा था और यह चक्रव्यूह भी टूटेगा।
आप अपने विचार मुझे comment box में साझा जरूर कीजिए कि यह डर सत्ता में अचानक से कहां से आ गया।
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