इतिहास में शक्ति और न्याय: बाबर और राणा सांगा का उदाहरण
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इतिहास दुनिया की सबसे बड़ी अदालत है। इससे बड़ी अदालत कोई नहीं है।
Supreme Court में क्या हुआ? High Court में क्या हुआ?
लड़ाई के मैदान में क्या हुआ? Elections में क्या हुआ?
ये सब बातें आती हैं, चली जाती हैं। बाद में रह जाता है केवल इतिहास।
और इतिहास का निर्णय हमेशा उसके पक्ष में गया इसने कभी उसका साथ नहीं दिया जो न्याय के साथ था, जो सही था। अगर ऐसा होता तो दिल्ली में बाबर Road होती। बाबर Road है, लेकिन राणा सांगा Road नहीं है।
क्योंकि बाबर आया, विजयी हुआ, राणा सांगा हार गया।
भारत की हिंदू शाही kingdom अफगानिस्तान से होती सिकुड़ती, सिकुड़ती, सिकुड़ती यहां तक नहीं आ जाती।
हमने किसी पर आक्रमण नहीं किया। हमने किसी के जीवन मूल्यों को नष्ट नहीं किया। हमने किसी के धर्म ग्रंथों को और धर्म स्थानों को नष्ट नहीं किया।
शायद हम न्याय संगत थे। शायद सत्य भी हमारे पक्ष में था, लेकिन शक्ति हमारे साथ नहीं थी।
इसलिए इतिहास ने हमें उसकी सजा दी। इतिहास ने हमेशा उनको सजा दी जिन्होंने विचारों को कर्म से और न्याय को शक्ति से अधिक महत्व दिया। अब मैं यह नहीं कह रहा हूं कि उसको उसकी तिलांजलि कर देनी चाहिए। यह नहीं है कि न्याय का अपना महत्व नहीं है,
लेकिन यदि conflict of interest हो तो शक्तिशाली बनना ज्यादा आवश्यक है।
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