SIR पर चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में दावा और RTI जवाब
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सबसे महत्वपूर्ण बात चुनाव आयोग ने Supreme Court को बताई है वो यह कि देशभर में Special Intensive Revision कराने का फैसला यानी कि विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का फैसला यानी Voter List में शुद्धिकरण का फैसला चुनाव आयोग ने unanimously लिया। यानी कि तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया। All three SIR orders June 2025,
October 2025 and May 2026 were unanimous decisions of the commission.
यानी कि Dr. विवेक जोशी ने, Dr. SS संधू ने और ज्ञानेश कुमार ने सहमति से फैसला लिया।
यह बताया है Supreme Court को Election Commission ने। पर सच क्या है?
जिस समय बिहार में SIR शुरू हुआ, 24 जून को Circular जारी हुआ। बिहार में बवाल मचा हुआ था। 68 लाख Voters के नाम काट दिए गए थे। वोट चोरी के आरोप जुड़े जा रहे थे। उस समय एक RTI दाखिल हुई थी। RTI में बाकायदा सवाल यह पूछा गया था कि जिस SIR ने पूरे बिहार में अफरा-तफरी मचा दी है, आखिर वह फैसला किसने लिया? मैं RTI की
finding आपके सामने रख देती हूं। सवाल क्या पूछा गया था?
28 जून को यह RTI दाखिल हुई। RTI में पूछा गया कि देशव्यापी SIR का फैसला लेने से जुड़ी फाइलें, नोटिंग, पत्राचार उपलब्ध करा दीजिए ताकि यह पता चले कि फैसला किसने लिया और कब लिया। आप जानते हैं उस वक्त Election Commission of India के Principal Secretary ने जवाब क्या दिया?
TCom का जवाब है on record है। कहीं भी जाकर check कर लीजिएगा। TCom जवाब में क्या कह रहे हैं? The Commission has so far not taken any decision on initiating a Special Intensive Revision across the country in 2025 and hence no information to be provided in this regard. लिया ही नहीं Commission ने SIR का फैसला और इसीलिए कोई फाइल इसके मद्देनजर,
इससे related, इससे ताल्लुक रखने वाली हम उपलब्ध नहीं करा सकते। यह TCom कह रहे हैं Election Commission of India.
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