बीजेपी नेताओं के परिवारवाद पर सवाल: जय शाह से रोहन जेटली तक
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मोदी सरकार में मौजूद हर एक मंत्री की हालत देख लीजिए।
फाइनेंस मिनिस्टर हों चाहे फॉरेन मिनिस्टर हों, एनवायरनमेंट मिनिस्टर हों चाहे एजुकेशन मिनिस्टर हों, एक भी फील्ड में ढंग का काम हो रहा हो तो बता दो।
जनता को तो कुछ मिल नहीं रहा है लेकिन इन बीजेपी नेताओं के बेटों को देखिए क्या मिल रहा है।
होम मिनिस्टर अमित शाह के बेटे जय शाह, ना ढंग से हिंदी बोलनी आती है ना ढंग से इंग्लिश बोलनी आती है।
"वर्ल्ड कप के लिए कुछ बोलता क्यों नहीं हूँ, मैं..."
"As you are, as you are knowing that we are living in..."
लेकिन इंडियन क्रिकेट का पूरा कंट्रोल इनके हाथ में दे दिया गया।
इसी तरह देखिए लेट अरुण जेटली का केस, जो कि एक यूनियन मिनिस्टर थे।
14 साल से दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट थे।
और अभी 2020 से उनके बेटे रोहन जेटली इसके प्रेसिडेंट बन गए हैं।
डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह का केस देखिए, इनके बेटे पंकज सिंह साइकिल फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट हैं।
एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर एस जयशंकर, इनके बेटे ध्रुव जयशंकर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के यूएस हेड हैं।
यह रिलायंस द्वारा सपोर्टेड एक पॉलिसी थिंक टैंक है।
लेकिन यह बाप-बेटों की कहानी बड़ी लंबी है दोस्तों।
कोई और पार्टी होती तो यहाँ पर नेपोटिज्म और करप्शन स्कैंडल्स की लाइनें लग जातीं, मीडिया में हेडलाइंस चल रही होतीं।
लेकिन क्या करें, गोदी मीडिया इन खबरों को आपको दिखाएगा ही नहीं।
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