भारत के विकास के लिए कर्म और कर्तव्य का संकल्प
31 sec About India
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कर्म मेरा धर्म रहेगा। कर्तव्य पालन मेरा प्रण होएगा। स्वयं से समस्ती तक, स्वयं से स्वयं तक। मेरे जीवन का कण कण, क्षण क्षण, भारत भूमि को समर्पित रहेगा और जब तक भारत विकसित नहीं होता, जब तक भारत विकसित नहीं होता, तब तक मैं न रुकूंगा,
न थकूंगा, न अपने पद से टिकूंगा।
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